बैकरेट ऑनलाइन डेमो: करोड़ों की लागत से बने सरकारी हॉस्टल, वर्षों बाद भी उदघाटन को है 'शुभ मुहर्त' की दरकार

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बैकरेट ऑनलाइन डेमो: करोड़ों की लागत से बने सरकारी हॉस्टल, वर्षों बाद भी उदघाटन को है 'शुभ मुहर्त' की दरकार

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वहीं तकलीफ बढ़ने के बैकरेट ऑनलाइन डेमो बाद जब डॉक्टर को इसकी सूचना दी गई, तो वे अस्पताल नदारद नजर आए.

दादरी की घटना पर यह सब मिलकर एक सवाल पैदा कर रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर क्यों अखलाक को मौत के बाद भी जिंदा रखने की कोशिश की जा रही है? किताब में ओमर में लिबताया हो कि उसे कभी पिता का प्यार नहीं मिला। ओमर ने लिखा है कि लादेन परिवार सऊदी अरब के सबसे अमीर परिवारों में शुमार था। लेकिन हमें पिता का प्यार नसीब नहीं हुआ, उनकी गोद शायद ही कभी नसीब हुई। दूसरे बच्चों की तरह खिलौनों से खेलने की हमें इजाजत नहीं थी। हम सिर्फ दूसरे बच्चों को कोल्ड ड्रिंक पीते हुए देख सकते थे, उन्हें पीने का हमें आदेश नहीं था। घर में भी वही होता था जो उनका आदेश होता था। ओमर ने लादेन के बारे में लिखा है कि वो पिता बहुत सख्त थे। छोटी सी गलती पर भी वो हमारी पिटाई करते थे। हमें रेगिस्तान में बिना पानी के भेज दिया जाता था।.

लॉकडाउन के चलते वह फैक्‍टरी पहले ही बंद हो गई थी, जिसमें वह काम करता था.

गांधी जी के मोतिहारी पहुंचने की खबर मिलते ही उन्होंने उन्‍हें भोजन के लिए आमंत्रित किया.

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भारी बारिश के कारण भी हादसा होने की आशंका है. मेहता ने पीटीआई से कहा, ‘चैंपियनशिप को औपचारिक रूप से मंजूरी देने और उसके अनुसार योजना बनाने के लिए हमें कार्यकारी समिति या ‘जनरल हाउस’ की एक बैठक की जरूरत है. पिछले 5 दिन में उत्तराखंड के 4 सपूत देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं.


स्रोत: Nanfang Daily Online    Editor in charge: hit